कोमाराम भीम की कहानी और इतिहास हिंदी में

कोमाराम भीम एक महान भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे। जानिए कोनाराम भीम की जीवनी हिंदी में, जन्म, जन्म और कैसे उन्होंने हैदराबाद को स्वतंत्रता देने के लिए बलिदान किया।

तेलंगाना के पवन भूमि पर कई महान एवं वीर पुरुष का जन्म हुआ। यहाँ के कई ऐसे भी वीर का जन्म हुआ जिन्होंने अपना साम्राज्य में बड़े अच्छे एवं शांति पूर्ण शासन किए। इन सभी महापुरुषों में एक महापुरुष काफी बाद में आए परन्तु जाने से पहले अपनी छाप पीछे छोड़ के ही गई।

क्या आप यह सोच रहे है की वह पुरुष है कौन ? अगर आप यह सोच रहे है तो हम आपको ज्यादा सोचने का नहीं देंगे और जल्द उस महापुरुष का परिचय आप सभी से करवाते है।

Komaram Bheem Biography In Hindi

komaram bheem original photo
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Name: Komaram Bheem


Birth Date: 22 October 1901


Birth Place: Asifabad


Death: 8 October 1940

कोमाराम भीम की जीवनी

जिस महापुरुष के बारे में आप सोच रहे है एवं जिनके बारे में हम आपको बतलाने को कहे थे वह पुरुष है कोमारम भीम। जी हा कोमारम भीम एक आदिवासी नेता थे जिन्होंने अपने जीवन काल में हैदराबाद शहर को मुक्त करने के लिए असफ जली राजवंश के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ी।

महापुरुष भीम का जन्म तेलंगाना राज्य के जोदेघाट जिले में अलिदाबाद के जंगलो में स्थित गोंडा आदिवासी समुदाय में 22 अक्टूबर 1901 को हुआ था। कोमारम भीम किसी प्रकार की औपचारिक शिक्षा या अपनी पहचान बाहरी दुनिया में नहीं करना चाहते थे।

इनका जीवन वीर सीताराम राजू से काफी प्रभावित था और उनके समान ये भी कुछ करने की इक्षा रखते थे और इस दरमियान भगत सिंह के मृत्यु की खबर पुरे देश में आग की तरह फ़ैल गई थी जो भीम को झझकोर कर रख दिया।

तभी निजाम के सरकारी जंगली अधिकारीओ के द्वारा हो रहे अत्याचार को कोमारम को पसंद नहीं आया और निजाम के खिलाफ विद्रोह करने का अहसास हुआ। कोमारम भीम ने अपने जीवन में एक नारा दिए थे की, “जल, जंगल और जमीन”।

इनके द्वारा दिए गए इस नारा का अर्थ यह था की वह व्यक्ति जो जंगल में रहता है या अपना जीवन व्यापन करता है उसे वन के सभी संसाधनों पर पूर्ण अधिकार होना चाहिए।

कोमाराम भीम की मृत्यु

16 अक्टूबर 1940 को थानेदार अब्दुल सत्तार के द्वारा भीम को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया पर भीम तैयार नहीं हुए। उस भयंकर चांदनी रात को अब्दुल अपने पुरे 90 सुसजित सैनिको के साथ निहत्थे भीम पर हमला करने को कहा गया परन्तु उस रात भीम के सभी समर्थक भीम की और से आगे बढे परन्तु इनके पास आक्रमक और बचाव के लिए तीर धनुष और ढाल था।

गोंडा समुदाय के लोग भीम का साथ देते हुए सिपाहियों के और बढ़ते रहे नजदीक पहुचने पर सिपाहियों ने सभी को मार गिराया और उस दिन से शहीद कोमारम भीम को आदिवासी समुदाय के द्वारा भगवान के रूप में पूजा जाने लगा।

अगर आपके पास और कोई अन्य जानकारी हो तो यहाँ पर जरुर बतलाये या अगर कुछ सुधर करना है तो भी बेहिचक अपनी राय रखे।

निष्कर्ष:

जी हाँ दोस्तों आपको आज की पोस्ट कैसी लगी, आज हमने आपको बताया कि कोमरम भीम जीवन इतिहास और कोमाराम भीम (Komaram Bheem) की कहानी बहुत ही आसान शब्दों में हमने भी आज की पोस्ट में सीखा।

Komaram Bheem Biography In Hindi आज मैंने इस पोस्ट में सीखा। आपको इस पोस्ट की जानकारी अपने दोस्तों को भी देनी चाहिए। तथा Social Media पर भी यह पोस्ट ज़रुर Share करे। इसके अलावा, कई लोग इस जानकारी तक पहुंच सकते हैं।

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