माँ का कर्ज – Moral Story in Hindi

माँ का कर्ज – Moral Story in Hindi

एक बार एक बेटा पढ़ लिखकर बहुत बड़ा आदमी बन गया। पिता के स्वर्गवास हो जाने के बाद माँ ने हर तरह का काम करने बेटे को पढाया और उसे लायक बना दिया लेकिन शादी के बाद से बेटे की पत्नी को अपनी सास से शिकायत रहने लगी की उसकी सास उनके स्टेटस में फिट नहीं है और वो जब लोग के सामने ये बताती है कि उसकी सास अनपढ़ है उसे बहुत ही शर्म महसूस होती है।

Moral Story in Hindi
Moral Story in Hindi

तो एक दिन बात के बढ़ जाने पर बेटे ने अपनी माँ से कहा कि माँ आज मैं इतना बड़ा और इस काबिल हो गया हूँ कि तेरे जितने मुझ पर क़र्ज़ है सूद समेत बता दे मैं चुकता कर सकता हूँ। अब तक के सारे जितने तूने खर्च किये है बता दे मैं ब्याज समेत अदा कर देता हूँ।

फिर हम दोनों अलग अलग सुखी रहेंगे इस पर माँ ने कहा बेटे हिसाब जरा लम्बा है मैं तुम्हे सोचा कर बताऊंगी इसके लिए मुझे थोडा सा समय देदे।

इस पर बेटे ने माँ से कहा कि मुझे कोई जल्दी नहीं है माँ तू सोच कर आराम से बता देना। लेकिन हाँ दो चार दिन के अंदर ही बता देना। रात हो गयी उसका बेटा सो रहा था माँ उसके कमरे में आयी और एक लौटा पानी लिया और जिस और बेटा करवट लेकर सो रहा था उस और पानी डाल कर गीला कर दिया इस पर बेटा करवट बदल कर सो गया तो माँ ने दूसरी और भी पानी डाल कर गीला कर दिया तो बेटे ने खीजते हुए कहा कि माँ ये क्या है क्यों परेशान कर रही है| तूने मेरे पूरे बिस्तर पर पानी पानी क्यों कर दिया।

इस पर माँ ने जवाब दिया बेटा तू पूछ रहा था न कि माँ तेरे जितने क़र्ज़ है बता दे मैं चुकता कर दूंगा। इसलिए मैं अभी ये हिसाब लगा रही थी कि मैंने कितनी राते तेरे बिस्तर को गीला कर देने के बात बिना नींद लिए काटी है और ये तो पहली रात है तू तो पहली रात में ही घबरा गया।

मैंने तो अभी हिसाब शुरू भी न किया कि तू चुकता कर पाए। माँ की इस बात ने बेटे को अंदर तक झकजोर दिया और वो समझ गया कि मन का क़र्ज़ आजीवन नहीं उतारा जा सकता है।

Moral Story in Hindi – माँ का क़र्ज़” कहानी आपको कैसी लगी हमे कमेंट्स में अवस्य बताएं!

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