महाराणा प्रताप जीवनी – Maharana Pratap History in Hindi

Maharana Pratap History in Hindi
Written by Vikas Sahu

पौराणिक महाराणा प्रताप और चेतक इतिहास अपनी हिंदी भाषा में। हमारे महान महाराज प्रताप की जिंदगी से जुडी जानकारी जैसे उनके जन्म, ऊँचाई, वजन, विवाह, पत्नी और पुत्रों का नाम, हल्दीघाटी की लड़ाई उनकी मृत्यु की कहानी।

महाराज प्रताप और अकबर के बिच युद्ध से जूडी कहानी आदि। मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप का पूरा नाम महाराणा प्रताप सिंह था। जानिए इनकी जीवनी हिंदी में, जन्म, परिवार और अन्य इतिहास के बारे में।

Maharana Pratap History in Hindi

Maharana Pratap History in Hindi

महाराणा प्रताप के कारण से राजपूतो को ना केवल भारत में सम्मान (सम्मान) मिला बल्कि पूरी दुनिया में उन्होंने पुरे भारत का नाम रौशन किया। महाराज प्रताप के बलिदान, वीरता और स्वदेशप्रेम की तुलना किसी और से नहीं की जा सकती है।

तो चलिए जानते हैं कि महाराणा प्रताप की इतिहास, ऊँचाई, वजन, उनकी जीवनी, विवाह, पत्नी का नाम, उनके बारे में उनके प्रिय और वफादार घोड़ों के बारे में विस्तार से, जिससे जानकर आपको भी गर्व होगा।

महाराणा प्रताप का जन्म

महाराज प्रताप का जन्म 9 मई सन 1540 में राजस्थान के कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ था।

उनके पिता का नाम राणा उदय सिंह था और इनकी माँ का नाम महारानी जयवंता कँवर था। बचपन से ही महाराणा प्रताप बहादुर, अभिमानी और आज़ादी प्रिय थे।

सन 1572 में जब वे मेवाड़ के राज-गद्दी पर बैठते तो उन्हें कई संकटों का सामना करना पड़ा था, लेकिन सब्र (धैर्य) और वीरता के साथ उन्होंने हरितताओं का सामना किया।

Maharana prathap singh Painting

Maharana prathap singh Painting

महाराणा प्रताप का विवाह

महाराज प्रताप ने 11 विवाह की थी और इन 11 पत्नियों से उनके कुल 19 बच्चे थे। उनके 11 पत्नियों के नाम और उन पत्नियों से प्राप्त हुए उनके पुत्रों के नाम है –

  1. पत्नी महारानी अजबड़े पंवार से उनके दो पुत्र थे पुत्र अमरसिंह और भगवानदास।
  2. पत्नी अमरबाई राठौर से उनके एक ही बेटे थे, नत्था।
  3. पत्नी शमीति बाई हाडा से भी उनके एक ही पुत्र थे, पुत्र पुरा।
  4. पत्नी अलमदेबाई चौहान से भी उन्हें एक ही पुत्र हुआ जिसका नाम पुत्र जसवंत सिंह था।
  5. पत्नी रत्नावती बाई परमार से उनके तीन पुत्र हुए, पुत्र माल, गज और क्लिंगु।
  6. पत्नी लखाबाई से उन्हें एक बेटा हुआ जिसका नाम रायभाना था।
  7. पत्नी जसोबाई चौहान से भी एक ही पुत्र था, पुत्र कलदास।
  8. पत्नी चंपाबाई जयंती से उनके तीन पुत्र हुए कल्ला, सनवालदास और दुर्जन सिंह।
  9. पत्नी सोलनखिनीपुर बाई से उन्हें दो बेटे हुए साशा और गोपाल।
  10. पत्नी फूलबाई राठौर से भी उनके दो बेटे चंदा और शिखा।
  11. पत्नी खीचर आशाबाई से भी उनके दो बेटे हत्थी और राम सिंह हुए।

महाराणा प्रताप का वजन

महाराणा प्रताप का वजन यानि की Weight 110 Kg और उनकी लम्बाई यानि की Height 7 Feet 5 Inch थी। महाराणा प्रताप का भाला, छाती का कवच, ढाल तथा दो तलवारों का Weight मिलाकर 208 Kg था। उनका भाला हीं केवल 81 Kg का था और उनका कवच भी 72 Kg का था। वे इतना सारा Weight लेकर हीं युद्ध-क्षेत्र में लड़ते थे।

हल्दीघाटी का युद्ध

हल्दी घाटी का युद्ध 18 जून, सन 1576 में मेवाड़ और मुगलों के बिच हुआ था। इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का संचालन (नेतृत्व) महाराणा प्रताप ने किया था।

इस लड़ाई में प्रताप की ओर से लड़ने वाले केवल एक ही मुस्लिम व्यक्ति थे जिनका नाम हकीम खान सूरी था और उनके 800 सैनिक (सेना) थे। इस लड़ाई में मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह, आसफ खान ने किया था।

Maharana Pratap Veer

Maharana Pratap Veer

इस युद्ध को आसफ खान ने अप्रत्यक्ष रूप से जेहाद की नाम दे दिया था। इस युद्ध के दवारान महाराणा प्रताप की रक्षा करने के लिए बींदा के झालामान ने अपने प्राणों की कुरबानी दे दी थी।

हल्दी घाटी की लड़ाई:

भले ही महाराणा-प्रताप शक्तिशाली मुगलों को हरा नहीं पाया गया, पर उन्होंने अपने साहस के का जो मिसल प्रस्तुत किया, वह बेहद अनोखा था।

लेकिन देखा जाए तो इस लड़ाई में महाराणा प्रताप की हीं जीत हुई क्योंकि अकबर के इतने विशाल सेना होने के बावजूद भी महाराणा प्रताप के कुछ सेनाओं ने उन्हें पूरे एक दिन तक युद्ध की और उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया था।

उन्होंने जिन हालत में युद्ध किया था, वे सच में कठिन थे, पर उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी वतन को ना तो निर्भर होने दिया ना ही अपमानित होने दिया।

अकबर, महाराणा प्रताप के राज्य को अपने साम्राज्य (साम्राज्य) में अनुरूप करना चाहता था, इसके लिए उन्होंने महाराणा प्रताप को समझाने के लिए लगातार 4 दूतों को भेजा:

  • जलाल खान कोरची
  • मानसिंह
  • भगवान दास
  • टोडरमल

महाराज प्रताप ने अकबर की परवशता को कभी नहीं अपनाया। 12 वर्षों के परिश्रम के बाद भी अकबर में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।

आखिकार लंबे समय के संघर्ष के बाद महाराणा प्रताप मेवाड़ को आजादी मिलने में कामयाब रहे और ये समय मेवाड़ के लिए एक सुनहरा पल साबित हुआ।

महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक

महाराणा प्रताप के सबसे प्यारा अश्‍व यानि की घोड़े का नाम चेतक (Chetak) था। हल्दी घाटी के युद्ध में चेतक ने अपनी इमानदारी, बुद्धिमानी एवं बहादुरी का परिचय दिया था।

युद्ध के दवरान जब मुगल सेना महाराणा प्रताप के पीछे लग गए थे , तब चेतक ने उन्हें अपनी पीठ पर लिए 26 Feet के उस नाले को पार कर गया था , जिसे मुगल सेना भी पार न कर सकी था।

युद्ध में बुरी तरह घायल हो जाने पर भी हेतक ने महाराणा प्रताप को सही सलामत रणभूमि से बाहर निकाल लाने में सफल रहा था। चेतक ने अंतिम सांस तक महाराणा प्रताप का साथ दिया था।

हल्दी घाटी में जिस स्थान पर पर प्रताप और उनके भाई ने चेतक का अंतिम संस्कार किया था उस स्थान पर उसका समाधी आज भी बना हुआ है।

कवि श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा “चेतक की वीरता” नाम से एक कविता भी लिखी गई है।

महाराणा प्रताप की मृत्यु

महारणा प्रताप का देहांत 19 January 1597 को चावंड में प्राकर्तिक कारणों की वजह से हुआ था।

इनकी मौत की खबर सुनते हीं अकबर को अत्यंत दुःख हुआ था और उसकी आंखे भी भर आई थी।

निष्कर्ष:

आज की पोस्ट के माध्यम से, आप जान गए हैं कि महाराणा प्रताप जीवनी और इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको हिंदी में Maharana Pratap History In Hindi में जानकारी दी है। आशा है कि आपको महाराणा प्रताप की जीवनी एवं इतिहास के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। हमने आपको इस पोस्ट में महाराणा प्रताप का इतिहास की हिंदी में जानकारी दी है, और आपने कितना सिखा हमें जरूर बताएं। आपको इस पोस्ट के माध्यम से महाराणा प्रताप की कहानी के बारे में भी पता चला।

Maharana Pratap Jivni In Hindi आज मैंने इस पोस्ट में सीखा। आपको इस पोस्ट की जानकारी अपने दोस्तों को भी देनी चाहिए। तथा Social Media पर भी यह पोस्ट ज़रुर Share करे। इसके अलावा, कई लोग इस जानकारी तक पहुंच सकते हैं।

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Vikas Sahu

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