रजिया सुल्तान जीवनी – Biography of Razia Sultan in Hindi

Razia Sultan History in Hindi
Written by Vikas Sahu

भारत में महान महिला शासिका Razia Sultan का नाम इतिहास में दर्ज है। जानिए उनसे जुडी जीवनी, Life, Family, Love, Marriage, और Death के Story के बारे में। रज़िया सुल्तान का Full Name “जलॉलात उद-दिन रज़ियॉ” था।

Razia Sultan History in Hindi

Razia Sultan History in Hindi

जलॉलात उद-दिन रज़ियॉ का जन्म सन 1205 में बदायूँ नामक एक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम शम्स-उद-दिन इल्तुतमिश और इनकी माँ का नाम कुतुब बेगम था।

उनके पिता जी ‘इल्तुतमिश’ की मृत्यु हो जाने के बाद, पुत्री रजिया को ही दिल्ली का सुल्तान बनाया जाना था। उस समय शम्स-उद-दिन इल्तुतमिश एक ऐसा पहला ऐसा शासक था जिन्होंने अपने राजगद्दी के बाद किसी एक महिला को अपना वारिस नियुक्त किया था।

परन्तु मुस्लिम समुदाय को इल्तुतमिश का ये फैसला नामंज़ूर था इसलिए उनकी मौत के बाद उनलोगों ने उसके छोटे पुत्र “रक्नुद्दीन फ़िरोज़ शाह” को ही राजसिंहासन पर बैठा दिया।

रजिया सुल्तान की जीवनी

पूरा नाम – जलॉलात उद-दिन रज़ियॉ


नाम: रजिया सुल्तान


जन्म – 1205


जन्मस्थान – बदायूँ, उत्तर प्रदेश, भारत


पिता – इल्तुतमिश ( Father of Razia Sultan )


माता – कुतुब बेगम


भाई-बहन: रुकन उद दीन फ़िरोज़ और नसीरुद्दीन महमूद


मृत्यु – 14 अक्टूबर, 1280

दिल्ली पर रक्नुद्दीन फ़िरोज़ शाह का शासन केवल 6 Month तक हीं चला। इल्तुतमिश की पत्नी का शासन पर नियंत्रण नहीं था। शान शौकत से भरा व लापरवाह रक्नुद्दीन के Against जनता में इतनी आक्रोश उमड़ा गई कि November 9, 1236 को रक्नुद्दीन तथा उसकी माँ की हत्या कर दी गयी।

रजिया सुल्तान का फोटो

उसके बाद मुसलमानों के पास कोई और विकल्प नहीं बचा इसलिए उन्हें “रजिया सुल्तान” को हीं दिल्ली की शासिका बनाना पड़ा।रजिया सुल्तान को सन 1236 में दिल्ली की शासिका बनाया गया था।

रज़िया सुल्तान का इतिहास

रजिया हीं एक ऐसी महिला थी जो की दिल्ली सल्तनत की First And Last महिला शासक बनी थी। ये केवल दिल्ली की हीं नहीं बल्कि पुरे भारत की पहली शासिका थी। रजिया सुलतान ने पूरे 5 Years तक (1236 से 1240 ई0) दिल्ली की सल्तनत पर अपना शासन चलाया।

रजिया के राजसिंहासन पर बैठने के बाद उसके चारों ओर घोर संकट छा गया था। दिल्ली सलतनत के अमीर और दरबारी अपने ऊपर एक महिला का शासन चलाना बर्दास्त नहीं कर पा रहे थे।

रजिया सुलतान एक बहुत हीं साहसी, कुशल स्वभाव और दूरदर्शी स्त्री थी। इसलिए उसने आहिस्ता आहिस्ता सरदारों को अपनी ओर करना शुरु कर दिया था। वे बहुत हीं प्रभावशाली तरीके से अपने दरबार को चलाती थी।

रजिया सुल्तान के कार्य

सिंहासन पर बैठने के बाद रज़िया ने अपने परम्पराओ के Against जाकर पुरुषों के जैसा सैनिकों का Coat व पगड़ी पहनना शुरु कर दिया था। वे युद्ध में बिना नकाब पहने घोड़े पर सवार होकर भी शामिल हुई।

अपने दरबार में भी रजिया पुरषों के जैसा खुले मुंह जाने लगी थी। एक स्त्री होने के बावजूद भी रजिया ने कभी भी हिम्मत नहीं हरी और हर बार सामने खड़े हो कर संकटो का सामना और मुकाबला किया जिस कारण भी सभी आधुनिक इतिहासकार आज भी उनकी प्रशंसा करते हैं।

रजिया सुल्तान की प्रेम कहानी

सिंहासन पर बैठने के बाद रजिया ने ‘जमालुद्दीन याकूत’ को घुड़साल (Stable) का प्रधान नियुक्त किया और “मलिक हसन गौरी” को सेनापति घोषित किया। कहा जाता है की रज़िया सुलतान और जमालुद्दीन याकुत प्रेमी थे। ये भी कहा जाता है की याकूत पर रजिया की कुछ ज्यदा हीं कृपा थी।

यही नहीं रजिया ने अपने निजी सहायक के लिए भी याकूत को हीं रखा था। इन दोनों के रिश्तो को ले कर मुस्लिम अभिजात वर्ग में काफी आक्रोश भडा हुआ था। तुर्क सरदार ने लोगों को भड़काकर मौका मिलते हीं इनका विद्रोह कर दिया।

सन 1239 में पहले लाहौर में विद्रोह किया गया और उसके बाद भटिंडा में। रजिया लाहौर में हुए विद्रोह को सफलतापूर्वक दबा चुकी थी परन्तु भटिंडा में हुए विद्रोह में प्रशासन अल्तुनिया से युद्ध के दवरान याकुत मारा गया और रजिया सुलतान को बंदी बना लिया गया।

अल्तुनिया रजिया का बचपन का मित्र था और वो रजिया से बेहद प्रेम भी करता था। परन्तु रजिया याकुत से प्रेम करती थी। ये बात अल्तुनिया को पता चला तो उसने युद्ध में याकुत को मरवा दिया।

रजिया जब अपने खिलाफ उठे विद्रोह को दबाने में जुटी हुई थी तब इधर दिल्ली में तख्त के मंत्री रजिया के भाई मैज़ुद्दीन बेहराम शाह से मिल गए और उसे हीं सिंघासन का सुल्तान घोषित कर दिया।

“वह स्त्री होकर भी पुरुष का मस्तिष्क रखती थी एवं बीस पुत्रों से भी बढ़कर थी।”

अपने राजसिंघासन को दुबारा पाने के लिए रजिया सुलतान ने मलिक अल्तूनिया से शादी कर ली। मलिक अल्तूनिया का सिंध प्रांत में धाक चलता था। रजिया, उसका पति और उनके सभी साथियों ने मिल कर दिल्ली पर आक्रमण करके बेहराम शाह के साथ युद्ध किया जिसमे उनकी हार हो गई।

रजिया सुल्तान की मृत्यु कैसे हुई?

उसके बाद रजिया और उसके पति दोनों दिल्ली आ रहे थे की 13 अक्तुबर, 1240 को कैथल मार्ग के पास उन दोनों की हत्या कर दी गई।

रज़िया सुल्तान का कब्र

रज़िया सुल्तान का कब्र

इन दोनों के मौत के बाद “बेहराम शाह” को भी उसके मूर्खता के कारण गद्दी से हटा दिया गया। और इस तरह एक महान महिला शाशक की अंत हो गया।

निष्कर्ष:

जी हाँ दोस्तों आपको आज की पोस्ट कैसी लगी, आज हमने आपको बताया कि रजिया सुल्तान इतिहास और Razia Sultan History बहुत ही आसान शब्दों में हमने भी आज की पोस्ट में सीखा।

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