आखिर अकेला क्यों हूँ, True Love Story in Hindi

अक्सर सभी लड़को की गर्लफ्रेंड्स होती है, नहीं तो ऐसी कुछ दोस्त ही होते हैं जो हर टाइम यानी दुख-सुख में उनके साथ रहते है. आज अपनी कहानी से मैं अपनी ज़िन्दगी के कुछ अनुभवो को शेयर करने जा रहा हूँ।

True Love Story in Hindi
True Love Story in Hindi

बात तबकि है जब मैं 10वीं क्लास में था मेरे काफ़ी दोस्त थे लेकिन मेरा कोई बेस्ट-फ्रेंड नहीं था क्यूंकी मेरे सभी दोस्त की गर्लफ्रेंड्स हुआ करती थी तो वो अक्सर उन्हें ही टाइम दिया करते थे यही कारण रहा के मेरा कोई बेस्ट-फ्रेंड नहीं बन सका, रही बात गर्लफ्रेंड की तो मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी क्यूंकी मैं बहुत शर्मिला मिज़ाज का लड़का था और लड़कियों से वैसे ही मुझे बहुत शर्म आती थी।

Why I’m so Alone? True Love Story in Hindi

उस टाइम मेरा एक फ्रेंड था जिसका नाम अमित था उससे मेरी काफ़ी बनती थी क्यूंकी वो मेरे घर के पास में रहा करता था उसकी 2 गर्लफ्रेंड हुआ करती थी एक स्कूल में और एक घर की साइड. वैसे तो मुझे कभी गर्लफ्रेंड बनाने में इंटरेस्ट नहीं था लेकिन बोलते है ना जैसी हमारी संगति होती है हम वैसे ही बन जाते है फिर क्या था।

एक दिन मैने अपने दोस्त यानी अमित को बोला की मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड बनाने में हेल्प कर तो उसने हाँ कह दिया लेकिन प्राब्लम ये थी की अब लड़की कहाँ से मिलेगी, तो हम शाम के टाइम अकाउंट्स के ट्यूशन जाया करते थे वहाँ एक लड़की जिसका नाम अनिता था वो भी वहाँ अकाउंट्स के ट्यूशन के लिए आया करती थी।

मैने अपने फ्रेंड अमित को उसे लड़की से बात कराने को बोला तो उसने मुझे बोला की पहले ये क्लियर हो जाने दे की वो तुझे देखती भी है या नहीं फिर मैं रोज उसे देखने लगा लेकिन वो मुझपर कुछ ज़्यादा इंटेरेस्ट नहीं लिया करती थी, करीब 1 महीने बाद एक दिन मैने सोचा की आज मैं खुद उस लड़की से फ्रेंडशिप के लिए बोलूँगा लेकिन उसके सामने आने पर मुझमे हिम्मत नहीं आई की मैं उसे अपने दिल की बात कह सकूँ।

फिर मैने अमित के मदद से उस लड़की से अपने फ्रेंडशिप करने की सोची तो अमित तैयार हो गया लेकिन फिर वो लड़की कुछ दिनों तक नहीं आई और फिर जब आई तो उस दिन अमित को अपने किसी ज़रूरी काम से जाना पड़ा लेकिन फिर अगले ही दिन मैने अमित को उससे फ्रेंडशिप करने को बोला और वो रेडी हो गया।

और अब छुट्टी के बाद अमित मेरी उस लड़की से बात करने वाला था यही सोच कर मुझे बहुत घबराहट हुए जिससे उस टाइम मेरा ट्यूशन में ध्यान ही नहीं लगा और आख़िर कार छुट्टी होते ही अमित उस लड़की के पास चला गया मेरी बात करने के लिए फिर जब वो आया तो उसने मुझे बोला की वो लड़की तुझे नहीं मुझे (अमित को) पसंद करती है।

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इतना सुनते ही मेरा दिल टूट गया लेकिन मैने शो नहीं किया जैसे कुछ हुआ ही ना हो और अमित को Its Okay Thank You! बोल कर अपने घर चला गया फिर रात भर इसी बात को ले कर परेशान रहा की मुझमे ऐसी भी क्या कमी है जो कोई भी मुझे पसंद नहीं करता ना दोस्ती करता है।

उस दिन मुझे लड़कियों से मानो नफ़रत से होने लगी थी, माना मैं गुस्से में था हुआ तो बुरा ही था मेरे साथ, ऐसा करते करते मेरा 10वीं कंप्लीट हो गया और फिर 11वीं में भी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बन सकी , जब मैं 12वीं क्लास में पहुँचा तो जैसे मानो मेरे किस्मत ही खुल गयी हो एक लड़की जिसका नाम कविता था वो मेरे पास आई और मुझसे मेरा नाम पूछने लगी और फिर मैने उसे अपना नाम बता दिया फिर उसने मुझसे जब पूछा के आपकी कोई गर्लफ्रेंड है तो मैने साफ़ माना कर दिया क्यूंकी कभी थी ही नहीं।

फिर उस लड़की ने मुझसे मारा नंबर माँगा लेकिन उस वक़्त मेरे पास अपना पर्सनल फोन नंबर नहीं था तो मैने जल्दी बाजी में उसे अपने घर का फोन नंबर दे दिया. फिर घर पहुँच कर मैं दिन भर फोन के पास ही मंडराता रहा ये सोच कर की वो फोन या मेसेज करेगी बुत उसने कोई मेसेज ओर फोन नहीं किया फिर अगले ही दिन वो लड़की मुझे फिर मिली स्कूल में क्यूंकि वो मेरे ही स्कूल में पढ़ती थी।

लेकिन वो बीएससी में थी और मैं कॉमर्स में, उसने मुझे बताया की उसको कल टाइम नहीं मिला तभी वो फोन में बात नहीं कर पाई और फिर मैने उसी दिन उसे खुद ही नंबर माँग लिया और उसने दे दिया फिर हम लोग अक्सर स्मस में बात किया करने लगे थे लेकिन मेरा फोन पर्सनल नहीं था तो मुझे उसे मेसेज या फोन करने में प्रॉब्लम्स आया करती थी।

टाइम बीतता गया. फिर मैने धीरे-धीरे पैसे जमा कर के एक सेकेंड हॅंड फोन ले ही लिया , फिर 12वीं कंप्लीट करने के बाद वो लड़की किसी और शहर शिफ्ट हो गई क्यूंकी उसके फादर आर्मी में थे तो उनकी पोस्टिंग हो गई थी. फिर हमारी बात कम से कम होने लगी और आज मैं अपना Bcom 2nd ईयर कर रहा हूँ और आज मेरी ना कोई गर्लफ्रेंड है ना कोई बेस्ट फ्रेंड जो मेरे किसी दुख-सुख में साथ रहे।

दोस्तो वैसे तो बहुत से ऐसे लोग होते है जिनके बहुत अच्छे अच्छे फ्रेंड्स होते हैं जो हर वक़्त उनके साथ रहते है और उनकी हेल्प करते है उनके हर दुख और सुख में बराबरी की भूमिका निभाते है लेकिन वो अपनी लाइफ में उनको ज़्यादा इंपॉर्टेन्स नहीं देते है ना ही कदर करते हैं।

और दूसरी तरफ ऐसे भी बहुत से लोग देखने को मिलते है जो हर टाइम अपने फ्रेंड्स के बारे में ही सोचते है उनकी हर तरहा से हेल्प करते हैं लेकिन ये सब करने के बावजूद उनको कोई अच्छा दोस्त नसीब नहीं हो पता और मैं भी उनमे से ही एक बदनसीब हूँ। True Love Story in Hindi

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