वर्ण किसे कहते है? परिभाषा, प्रकार और उदाहरण

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ध्वनि संकेतों को (वायु) ध्वनि कहा जाता है। लिखित ध्वनि संकेतों को देवनागरी लिपि के अनुसार वर्ण कहा जाता है, देवनागरी लिपि में प्रत्येक ध्वनि के लिए एक निश्चित चिन्ह (वर्ण) होता है।

Varn Kise kahte hai

भाषा की सबसे छोटी इकाई अक्षर या ध्वनि है, जबकि भाषा की सबसे छोटी सार्थक इकाई को एक वाक्य माना जाता है। भाषा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत बोलने वाले शब्द से हुई है।

वर्ण विचार हिंदी व्याकरण का पहला भाग है जिसमें भाषा की मूल इकाई ध्वनि है और अक्षर माना जाता है।

वर्ण के प्रकार

वर्णों के समुदाय को ही वर्णमाला कहते हैं हिंदी वर्णमाला में 44 वर्ण हैं। उच्चारण और प्रयोग के आधार पर हिंदी वर्णमाला में वर्णों के दो प्रकार होते हैं।

हिंदी भाषा में वर्ण दो प्रकार के होते है।

  • स्वर (Vowel)
  • व्यंजन (Consonant)

वर्णमाला (Alphabet )

किसी भाषा के ध्वनि चिन्हों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं। हिंदी भाषा की वर्णमाला में 47 वर्ण माने गए हैं। जिसमें 10 स्वर और 35 व्यंजन होते हैं। लिखने के आधार पर 52 प्रकार के वर्ण माने गए हैं। 13 स्वर , 35 व्यंजन तथा 4 संयुक्त व्यंजन है।वर्ण जो स्वतंत्र रूप से उच्चारित किया जाता है।

Hindi Varnmala

अर्थात् उनके उच्चारण में किसी अन्य अक्षर की मदद नहीं ली जाती है, वह वर्ण जिनके उच्चारण के लिए किसी दूसरे वर्णों की सहायता नहीं पड़ती उन्हें वर्ण कहते हैं। हिंदी वर्णमाला के अनुसार स्वर की संख्या 13  है।

वर्ण के मुख्यत दो भेद माने गए हैं – स्वर , व्यंजन।

ह्रस्व स्वर किसे कहते है

जिन स्वरों के बोलने में कम से कम समय लगे उन्हें ह्रस्व स्वर कहते है. ये चार संख्या में है. जैसे अ,इ,उ,ऋ |

दीर्घ स्वर किसे कहते है

जिन स्वरों के बोलने में ह्रस्व स्वर से दोगुना समय लगे उन्हें दीर्घ स्वर कहा जाता है. ये सात होते है. जैसे आ,ई,ऊ,ए,ऐ,ओ,औ |

प्लुत स्वर किसे कहते है

जिन स्वरों को बोलने में ह्रस्व स्वर से तिगुना समय लगे ,उसे प्लुत स्वर कहते है :- जैसे – ओउम , राम

व्यंजन किसे कहते है

जिन वर्णों के उच्चारण में स्वरों का प्रयोग होता है, उन्हें व्यंजन कहा जाता है। स्वरों के बिना व्यंजन का उच्चारण संभव नहीं है। उनका उच्चारण मुख्य से निकलने वाली हवा के साथ हस्तक्षेप करता है।

जिन वर्णों का उच्चारण पूर्ण उच्चारण के लिए किया जाता है, उन्हें व्यंजन कहा जाता है। अर्थात् स्वरों की सहायता के बिना व्यंजन नहीं बोले जा सकते। यह संख्या में 33 है।

व्यंजन के भेद: व्यंजन के तीन प्रकार के होते है

स्पर्श व्यंजन क्या है?

व्यंजन का उच्चारण करते समय, जीभ मुंह के विभिन्न हिस्सों को छूती है। उन्हें स्पर्श व्यंजन कहा जाता है। 25 से 25 तक स्पर्श व्यंजन हैं।

  1. क वर्ग – क , ख , ग , घ , ङ
  2. च वर्ग – च , छ , ज , झ , ञ
  3. ट वर्ग – ट , ठ ,ड़ ,ढ ण
  4. त वर्ग – त ,थ , द , ध ,न
  5. प वर्ग – प , फ ,ब ,भ ,म

अन्तस्थ व्यंजन क्या है?

वे व्यंजन जिनकी जीभ मुंह के किसी भी हिस्से को पूरी तरह से उच्चारण करते हुए स्पर्श नहीं करती, उन्हें आंतरिक व्यंजन कहा जाता है।

उष्म व्यंजन किसे कहते हैं

जिन व्यंजन में एक विशेष प्रकार का घर्षण होता है और मुंह से निकलने वाली गर्म हवा को गर्म व्यंजन कहते हैं, वे भी चार हैं जैसे – श, श, स, हा।

महत्वपूर्ण जानकारी

  • जब किसी स्वर का उच्चारण नासिका और मुख से किया जाता है तब उसके ऊपर चंद्र बिंदी लगाया जाता है।
  • अनुस्वार का उच्चारण(न् ,म्) के समान होता है इसका चिन्ह बिंदी आकार होता है जैसे – मंगल , जंगल , हंस आदि।
  • विसर्ग (:) का उच्चारण हो के समान होता है जैसे – अतः, दुखः

वर्णों के उच्चारण का स्थान

वर्णों के उच्चारण के दौरान जीभ की स्थिति बदलती है। प्रत्येक अक्षर के उच्चारण में जीभ की स्थिति बदलती है। इन स्थानों को उच्चारण स्थान कहा जाता है।

उच्चारण का स्थान वर्ण का स्थान
कंठ्यअ , क वर्ग , ह और विसर्ग
तालुइ , च वर्ग , य और श
मूर्धाऋ ,ट वर्ग , र और ष
दन्तलृ , त वर्ग , ल , स
ओष्ठउ , प वर्ग
नासिकाड़ , ञ , ण , न , म
दन्त और ओष्ठ
कंठ और तालुए , ऐ
कण्ठ और ओष्ठओ , औ

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