गेहूं की खेती कैसे करें (Wheat Farming)

गेहूं की वैज्ञानिक खेती के बारे में जानकारी, हर किसान भाई गेहूं की वैज्ञानिक और उन्नत खेती करके लाखों कमा सकता है। गेहूं की खेती के बारे में जानकारी प्राप्त करें, जिसे सरल भाषा में गेहूं के रूप में भी जाना जाता है।

यदि वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए तरीके से गेहूं की खेती की जाए, तो किसानों को बहुत लाभ हो सकता है, बस कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा जैसे कि खेती के लिए भूमि का उपयोग कैसे किया जाना चाहिए, जलवायु क्या होनी चाहिए, कब सिंचाई करनी चाहिए और बुवाई आदि कब की जानी चाहिए।

Wheat Scientific Farming in Hindi

नीचे हम आपको इन सभी चीजों के बारे में बताएंगे जिससे आप अच्छी तरह से गेहूं की खेती कर पाएंगे।

गेहूं की खेती कैसे करें? How To Do Wheat Farming

आज के दौर में किसान वैज्ञानिक तरीके से गेहूं की खेती कर आसानी से लाखों कमा सकते हैं। अगर गेहूँ की खेती सही तरीके से की जाए तो आप एक अच्छा लाभ बचा सकते हैं।

इसके अलावा आप हल्दी की खेती करके भी महत्वपूर्ण लाभ कमा सकते हैं। तो आइए जानते हैं कैसे करें गेहूं की खेती:

भूमि का चयन और तैयारी

गेहूं की खेती करने समय भूमि का चुनाव अच्छे से कर लेना चाहिए। गेहूँ की खेती में अच्छे फसल के उत्पादन के लिए मटियार दुमट भूमि को सबसे सर्वोतम माना जाता है।

लेकिन पौधों को अगर सही मात्रा में खाद दी जाए और सही समय पर उसकी सिंचाई की जाये तो किसी भी हल्की भूमि पर गेहूँ की खेती कर के अच्छे फसल की प्राप्ति की जा सकती है।

खेती से पहले मिट्टी की अच्छे से जुताई कर के उसे भुरभुरा बना लेना चाहिए। फिर उस मिट्टी पर ट्रेक्टर चला कर उसे समतल कर देना चाहिए।

जलवायु कैसी हो?

कटाई के समय गेहूं की खेती के लिए कम तापमान और शुष्क और गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है। इसलिए, गेहूं की खेती ज्यादातर अक्टूबर या नवंबर के महीनों में की जाती है।

बुआई कैसे और कब करें?

गेहूं की बुवाई का सही समय 15 नवंबर से 30 नवंबर तक है। यदि बुवाई 25 दिसंबर के बाद की जाती है, तो उपज प्रति दिन लगभग 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से कम हो जाती है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 20 सेमी होनी चाहिए।

बीज उपचार की जानकारी

गेहूं की खेती में बीज बोने से पहले, बीज की अंकुरण क्षमता की जाँच करनी चाहिए। यदि गेहूं के बीज का इलाज नहीं किया जाता है, तो बीज को बुवाई से पहले एक कवकनाशी (फफूंदी नाशक दवा) के साथ इलाज किया जाना चाहिए।

उर्वरक प्रबंधन (खाद प्रबंधन)

नाइट्रोजन: अधिक उपज के लिए, 120 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर गेहूं में मिलाया जाना चाहिए। यदि दालों या हरी खाद को पहले खेत में लगाया गया है, तो यह मात्रा 100 किग्रा / हेक्टेयर रखी जा सकती है।

बुवाई के समय नाइट्रोजन की दो-तीन या मध्य मात्रा, कतारों के बीच पहली मल्चिंग के समय एक तिहाई या आधी मात्रा। रेतीली भूमि में नाइट्रोजन का तीन बार दान करना चाहिए। यदि धान के बाद गेहूं बोया जा रहा है, तो नाइट्रोजन 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर देना चाहिए।

फास्फोरस और पोटाश: मिट्टी की जांच के आधार पर फास्फोरस और पोटाश को लगाना चाहिए। यदि परीक्षण नहीं किया गया है, तो फास्फोरस 50-60 किग्रा / हेक्टेयर की दर से दिया जाना चाहिए।

पोटाश की कमी होने पर ही खेत में लगाना चाहिए। यदि संभव हो तो, उर्वरक के साथ 3-5 सेमी बीज के बगल में उर्वरक लागू किया जाना चाहिए। यदि यह मशीन नहीं मिल सकती है, तो उर्वरक को समान रूप से फैलाना चाहिए। कुछ बिंदु पर बीज और उर्वरक को एक साथ मिलाया जाना चाहिए।

सिंचाई प्रबंधन

अच्छी फसल की प्राप्ति के लिए समय पर सिंचाई करना बहुत जरुरी होता है। फसल में गाभा के समय और दानो में दूध भरने के समय सिंचाई करनी चाहिए। ठंड के मौसम में अगर वर्षा हो जाये तो सिंचाई कम भी कर सकते है।

कृषि वैज्ञानिको के मुताबिक जब तेज हवा चलने लगे तब सिंचाई को कुछ समय तक रोक देना चाहिए। कृषि वैज्ञानिको का ये भी कहना है की खेत में 12 घंटे से ज्यादा देर तक पानी जमा नहीं रहने देना चाहिए।

गेहूँ की खेती में पहली सिंचाई बुआई के लगभग 25 दिन बाद करनी चाहिए। दूसरी सिंचाई लगभग 60 दिन बाद और तीसरी सिंचाई लगभग 80 दिन बाद करनी चाहिए।

खरपतवार की जानकारी

गेहूँ की खेती में खरपरवार के कारण उपज में 10 से 40 प्रतिशत कमी आ जाती है। इसलिए इसका नियंत्रण बहुत ही जरुरी होता है। बिज बुआई के 30 से 35 दिन बाद तक खरपतवार को साफ़ करते रहना चाहिए।

गेहूँ की खेती में दो तरह के खरपतवार होते है पहला सकड़ी पत्ते वाला खरपतवार जो की गेहूँ के पौधे की तरह हीं दिखता है और दूसरा चौड़ी पत्ते वाला खरपतवार।

खड़ी फसल की देखभाल

कृषि वैज्ञानिको का कहना है की गेहूँ का गिरना यानि फसल के उत्पादन में कमी आना। इसलिए किसानो को खड़ी फसल का खास ख्याल रखना चाहिए और हमेशा सही समय पर फफूंदी नाशक दवा का इस्तेमाल करते रहना चाहिए और खरपतवार का नियंत्रण करते रहना चाहिए।

फसल की कटनी और भंडारा

गेहूँ का फसल लगभग 125 से 130 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है। फसल पकने के बाद सुबह सुबह फसल की कटनी करना चाहिए फिर उसका थ्रेसिंग करना चाहिए। थ्रेसिंग के बाद उसको सुखा लें। जब बिज पर 10 से 12 Percent नमी हो तभी इसका भंडारण करनी चाहिए।

निष्कर्ष!

अन्य जानकारी गेहूं की खेती के लिए के लिए हम आपको आगे भी अभी ऐसे ही जानकारी देते रहेंगे, गेहूं की विज्ञानिक खेती के लिए आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी काफी महत्वपूर्ण होगी तथा अगर आपका कोई भी सवाल है तो आप कमेंट करके हमसे पूछ भी सकते है।

आशा करता हूँ की आपको यहाँ Wheat Scientific Farming Tips in Hindi की दी गयी Information अच्छी लगी होगी, अगर आपके पास कोई गेहूँ का फसल से जुड़ा Question या सवाल हो तो आप निचे दिए गए फॉर्म के द्वारा जरुर पूछे।

आज के लेख में हमने आपको बताया है कि बेहतर गेहूं की विज्ञानिक खेती की जानकारी (Wheat Farming) फॉलो करके आप अछे से फोटोग्राफी कर सकते है। हिंदी में बहुत सरल भाषा में गेहूं की खेती की जानकारी और परिभाषा प्राप्त करें।

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Vikas Sahu
मैं एक पेशेवर ब्लॉगर हूँ, इस ब्लॉग पर आप उन लेखों को पढ़ेंगे जिनसे आप अपना करियर और पैसा दोनों ऑनलाइन ब ना सकते हैं.. read more

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