जन गण मन अधिनायक जय है (Hindi)

जन गण मन भारत का राष्ट्रीय गीत है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर भारत के बंगाली साहित्य के अग्रणी कवि थे, जिन्होंने Jana Gana Mana को लिखा था। उनकी कविता प्रकृति की सुंदरता और सबसे कोमल मानवीय भावनाओं का उत्कृष्ट चित्रण है।

Jana Gana Mana” उनके द्वारा रचित एक विशेष कविता है, जिसके प्रथम श्लोक को हमारे राष्ट्रगान होने का गौरव प्राप्त है। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर काव्यालय की ओर से यह कविता आप सभी के समक्ष उसके मूल बांग्ला रूप में प्रस्तुत है।

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राष्ट्रगान के नियमों का पालन नहीं करने और राष्ट्रगान का अपमान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम- 1971 की धारा-3 के तहत कार्रवाई की जाती है।

Jana Gana Mana – भारत का राष्ट्र गान

बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी की प्रिंसिपल और कवि जेम्स एच. कजिन्स की पत्नी मार्गरेट ने राष्ट्रगान के अंग्रेजी अनुवाद के लिए संगीतमय संकेतन तैयार किए।

जन-गण-मन अधिनायक जय हे,
भारत भाग्य विधाता!
पंजाब-सिंध-गुजरात-मराठा,
द्राविड़-उत्कल-बंग
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा,
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभाशीष मागे
गाहे तव जय गाथा।
जन-गण-मंगलदायक जय हे,
भारत भाग्य विधाता!
जय हे! जय हे! जय हे!
जय जय जय जय हे!

बंगाली और देवनागरी लिपि में

জনগণমন-অধিনায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!
পাঞ্জাব সিন্ধু গুজরাট মারাঠা দ্রাবিড় উৎকল বঙ্গ
বিন্ধ্য হিমাচল যমুনা গঙ্গা উচ্ছলজলধিতরঙ্গ
তব শুভ নামে জাগে, তব শুভ আশিষ মাগে,
গাহে তব জয়গাথা।
জনগণমঙ্গলদায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!
জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয় জয় হে॥

Jana Gana Mana with English Lyrics

Thou art the ruler of the minds of all people,
Dispenser of India’s destiny.
The name rouses the hearts of Punjab, Sindh, Gujarat, and Maratha,
Of the Dravid and Orissa and Bengal;
It echoes in the hills of the Vindhyas and Himalayas,
Mingles in the music of the Yamuna and Ganga
And is chanted by the waves of the Indian Sea.
They pray for thy blessings and sing thy praise.
The salvation of all people is in thy hand,
Thou dispenser of India’s destiny.
Victory, victory, victory to thee.

जन गण मन के बारे में रोचक तथ्य

हमारे राष्ट्रगान के बारे में कई रोचक तथ्य हैं, जानिए इसे किसने लिखा है, इसे कब तक गाया जाता है और आखिर क्या है जन गण मन का इतिहास और महत्व। कहा जाता है कि टैगोर ने यह गीत अंग्रेज जॉर्ज पंचम की प्रशंसा में लिखा था। टैगोर ने 1939 में लिखे एक पत्र में इसे खारिज कर दिया था।

कानून के मुताबिक किसी को भी राष्ट्रगान गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान गाते या बजाते समय शांति से खड़ा रहता है, तो इसे राष्ट्रगान या राष्ट्र का अपमान नहीं माना जाता है।

  • रवींद्रनाथ टैगोर ने 1911 में एक कविता लिखी थी, जो 5 छंदों में थी।
  • राष्ट्रगान को गाने में 52 सेकेंड का समय लगता है।
  • इसका संक्षिप्त रूप (पहली और अंतिम पंक्ति) गाने में 20 सेकंड का समय लेता है।
  • जन गण मन कविता के पहले छंद को राष्ट्रगान के रूप में लिया गया है।
  • सुभाष चंद्र बोस ने इस गाने का हिंदी व उर्दू में अनुवाद करवाया था।
  • जन-गण-मन बंगाली भाषा में लिखा गया है, जिसमें संस्कृत शब्द शामिल हैं।
  • यह गीत पहली बार 27 दिसंबर, 1911 को कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था।
  • इस गीत को आधिकारिक तौर पर 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था।
  • राष्ट्रगान के गीत और राग की रचना स्वयं रवींद्रनाथ टैगोर ने मदनपल्ले, आंध्र प्रदेश में की थी।
  • सरकार के निर्देशानुसार फिल्मों स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म के किसी भी हिस्से में खड़े होकर राष्ट्रगान गाना जरूरी है।

जन गण मन किसने लिखा था?

जन गण मन, भारत का राष्ट्रगान है जो मूलतः बंगाली में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया था।

भारतीय राष्ट्रगान में कितने शब्द हैं?

भारतीय Jana Gana Mana में 49 शब्द हैं।

जन गण मन किसके लिए गाया गया था?

यह गीत 1911 में गुरुदेव रवींद्रनाथ द्वारा लिखा गया था। फिर उन्होंने ब्रिटिश राजा जॉर्ज V II और उनकी पत्नी क्वीन मैरी के भारत आगमन पर अंग्रेजों के दबाव में स्वागत करने के लिए अधिनायक शब्द का इस्तेमाल किया।

राष्ट्रगान किस पुस्तक से लिया गया है?

भारत के राष्ट्रगान की पंक्तियाँ रवींद्रनाथ टैगोर के गीतों ‘भारतो भाग्य बिधाता’ से ली गई हैं।

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